नहीं सुन ये तो पहले उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर में हाल ही में संपन्न हुई एक शादी पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गई है। से दिल को जीतने वाली खबर सामने आई है। शादी के इस खास अवसर पर दूल्हे Awadhesh Rana ने ऐसा कदम उठाया, जिसने न सिर्फ दुल्हन के परिवार को भावुक कर दिया बल्कि इस मुद्दे पर पूरे क्षेत्र में सकारात्मक चर्चा शुरू कर दी। दहेज जैसी कुप्रथा के खिलाफ मज़बूत संदेश देते हुए Awadhesh Rana ने दुल्हन पक्ष से मिले 31,00,000 वापस कर दिए। और यह स्पष्ट कर दिया कि रिश्ते के लिए ‘उपहार’ नहीं, बल्कि ‘सम्मान’ जरूरी होता है।
दुल्हन की भावनाएँ छलकीं—“ऐसे दूल्हे हर घर में हों”
असल में दूल्हे ने दुल्हन के परिवार की तरफ से दिए गए ₹31,00,000 लेने से इनकार करके एक मिसाल कायम की। एक हफ्ते पहले Awadhesh Rana उम्र 26 साल है और अदिति सिंह उम्र 24 की है। यहां बुढ़ाना तहसील के शहाबुद्दीनपुर गांव में शादी हुई है। इस दौरान लड़की वालों ने Awadhesh Rana को एक थाल में देकर ₹31,00,000 दिए, जिन्हें लेने से उन्होंने इनकार कर दिया।
इतनी बड़ी रकम लेने से मना करने के बाद अब गांव लोगों की निगाहों में आ गए और दोनों अभिभावकों ने तालियां बजाकर स्वागत किया। आदित्य के परिवार खासकर उनके नाना सुखपालसिंह के लिए ये एक इमोशनल पल था। अदिति कोविंद 19 महामारी के दौरान अपने पिता की। मृत्यु के बाद से नाना के पास रह रही थी। सुखपाल ने अपनी नातिन की शादी के लिए ये पैसे रखे हुए थे लेकिन जैसे ही थाल सामने आयी Awadhesh Rana रुक गए।

Awadhesh Rana हाथ जोड़कर और धीरे-धीरे से झुककर उन्होंने उसे पीछे सरका दिया। उन्होंने कहा, मुझे इसे लेने का कोई हक नहीं। यह उनकी दुल्हन यानी नानाजी की मेहनत की कमाई है। अवधेश ने कहा, हम दहेज प्रथा के खिलाफ़ है। इसके बाद थोड़ी देर के लिए आंगन में सन्नाटा छा गया,
“अगर हर घर में Awadhesh Rana जैसे विचारों वाले दूल्हे हों, तो दहेज की समस्या अपने आप खत्म हो जाएगी।”
यह सिर्फ एक बयान नहीं था—यह उन लाखों लड़कियों का सपना था, जो दहेज की वजह से मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दबाव झेलती हैं।
मैंने अच्छा किस, क्योंकि आप पढ़ी लिखी किस तरह स्वीकार्य?
क्योंकि एक जो दहेज है, उससे समाज में अभिशाप माना जाता है। बहुत सी लड़कियों को मार भी जाता है।तो आपने सोचा था कि कभी ऐसा होगा की बस जिनसे मेरी शादी हो रही है और वो ₹31,00,000 वे लौटा रहे हैं?
दहेज नहीं, समानता चाहिए
Awadhesh Rana ने यह स्पष्ट किया कि विवाह दो परिवारों के बीच का पवित्र बंधन है।
इस बंधन में पैसे या सामान की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए।
उनका यह निर्णय न सिर्फ दुल्हन के लिए सम्मान का प्रतीक है, बल्कि समाज के लिए संकेत भी है कि बदलाव व्यक्तिगत स्तर से ही शुरू होता है।
सोचा तो कभी ऐसा होगा मैंने जो सोचा जनता पर।यह परिवार संपन्न है और ये सब चीजें देखी हैं।बंद होनी चाहिए। माँ बाप अपने बच्चों को पालते हैं विनिर्देश हैं लेकिन जो अंशु बन पाता फिर वो देखते हैं।
लेकिन वो तो अच्छी है कि अच्छे ही मैसेज हैं इन सबके लिए और ये सब चीजें बंदी होनी चाहिए की जो पैरेंटस होते हैं वो कर्जा लेकर शादी करते हैं की हाँ जी तो ये बंद होना चाहिए।तो कितनी अच्छी पहल मानते हैं जब देश जीने की है?
बहुत अच्छा।समाज में इसे एक अच्छा मैसेज आ रहा है। बहुत से लोग कह रहे हैं बहुत अच्छा मैसेज गया है और इसी तरह ही होना चाहिए।तो आपको अच्छा लगा जब वे दहेज ठुकराया। आपको कब पता लगा कि जब क्योंकि सगाई चल रही थी तो कैसे पता लगा आपको?
मुझे परिवार वालों ने आगे बताया था।चले हैं। वे एक ही उठाए हैं तो मुझे बहुत खुशी हुई। यह जान के अच्छा आप आप ससुराल में है, आपके ससुर है नंदनीय किस तरह का मोल देख रहे हो आप यहाँ पे सुनने मेरा पूरा परिवार बहुत आशावादी हैं। बहुत ख्याल रखें ऐसी घर जैसा ही लग रहा है।
दहेज के दबाव से समाज में मौजूद तनाव और परेशानियों के बीच, जब दूल्हे ने रकम लौटाने का फैसला सुनाया, तो दुल्हन की आँखें नम हो गईं।
उसने भावुक होकर कहा,
समाज में बढ़ती चर्चा—एक नई मिसाल
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर लोगों ने Awadhesh Rana की जमकर सराहना की।
कई लोगों ने लिखा कि—
- दहेज की सोच को खत्म करने के लिए ऐसे कदम बेहद ज़रूरी हैं
- यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है
- दूल्हे ने यह दिखा दिया कि अच्छे संस्कार और मानवीय सोच ही किसी परिवार को महान बनाती है
यह शादी अब सिर्फ एक पारिवारिक आयोजन नहीं रह गई—यह एक मिसाल बन चुकी है।
क्या बदलाव की शुरुआत हो चुकी है?
दहेज प्रथा पर कानून होने के बावजूद, यह कई जगहों पर अब भी जारी है।
लेकिन जब समाज के युवा खुद आगे आकर इसे रोकते हैं—
तभी असली बदलाव दिखाई देता है।
Awadhesh Rana का कदम यह उम्मीद जगाता है कि आने वाले समय में:
- और भी परिवार दहेज लेने-देने से इंकार करेंगे
- लड़कियों को बोझ नहीं, सम्मान मिलेगा
- समाज में समानता और समझ बढ़ेगी
निष्कर्ष
यह घटना सिर्फ एक शादी की कहानी नहीं है—यह एक संदेश है।
एक ऐसा संदेश जो कहता है कि—
👉 प्यार और सम्मान पैसों से बड़ा होता है
👉 दहेज नहीं, संस्कार परिवार बनाते हैं
👉 बदलाव की शुरुआत एक व्यक्ति से भी हो सकती है